Hot Posts

6/recent/ticker-posts

Breaking News

13/recent/ticker-posts

दस्यु सुंदरी की रोचक कहानी/ब्रांडेड कपड़े व महंगे चश्मों की शौकीन सरला कैसे बन गई दस्यु सुंदरी 18 साल बाद इटावा जेल से मिली रिहाई

इटावा। (सर्वेश पाण्डेय की रिपोर्ट)18 साल बाद जेल से रिहा हुई दस्यु सुंदरी सरला जाटव की कहानी बड़ी भी अजीब है उसे ब्रांडेड महंगे कपड़ों और चश्मे पहनने का शौक था. 13 साल की उम्र में वो डकैत के दत्तक बेटे की पत्नी बनी और कमर पर कारतूस की पेटी पहन कंधे पर बंदूक रखकर चलना उसका शगल बन गया था. गिरोह की कमान संभालने के दौरान सरला रौब में रहती थी, उसे ऐसे ही दस्यु सुंदरी नहीं कहा जाता था. वह ब्रांडेड और महंगे कपड़े पहनती और तरह तरह के चश्मे लगाती थी. जींस-टीशर्ट पहनकर कंधे पर बंदूक रखकर चलना उसका शौक था. उस समय उसे देखने वालों की मानें तो कभी वो खाकी वर्दी, डार्क लिपिस्टिक और माथे पर बिंदी और हाथों में चूड़ियां पहने भी नजर आती थी


दरअसल, सरला जाटव बीहड़ के कुख्यात डकैत निर्भर गुर्जर की बहू थी. आरैया जनपद के अजीतमल के नियामतपुर गांव में रहने वाली बसंती से वर्ष 1994 में डकैत निर्भय ने शादी की थी. शादी के पांच साल बाद वर्ष 1999 में बसंती मौका पाकर निर्भय के गिरोह से भाग निकली थी. निर्भय उसे खोजता हुआ गांव पहुंचा तो वो नहीं मिली, इस पर निर्भय उसके भाई महाराज सिंह जाटव की 11 साल की बेटी सरला को उठाकर गिरोह में ले आया. बाद में उसने बसंती और उसके भाई महाराज सिंह की हत्या कर दी थी. दो साल तक गिरोह में रखने के बाद डकैत निर्भय ने अपने दत्तक पुत्र श्याम जाटव से करवा दी थी, तब वो 13 साल की थी

शादी के बाद सरला जाटव की बीहड़ में दस्यु सुंदरी की पहचान बन गई. वह कंधे पर बंदूक रखकर और कमर में कारतूस की पेटी पहनकर घूमती थी. सरला की चाल और हावभाव देखकर गैंग के सदस्य उसे लीडर बुलाने लगे थे और उसकी गैंग में खूब चलने लगी थी. निर्भय भी उस पर पूरा भरोसा करने लगा था. कुछ बड़ी घटनाओं में सरला का नाम आते ही पुलिस की नजर में आ गई और उस पर इनाम घोषित कर दिया गया. निर्भय जब भी बाहर रहता था तब गैंग की कमान वो संभालती थी. उसने गिरोह के साथ पकड़ने आई पुलिस टीम पर भी हमला बोला था. वहीं गांव के कोटेदार की हत्या और सहसो गांव से छह किसानों के सामूहिक अपहरण की घटना को अंजाम दिया था. दस्यु सुंदरी पर हत्या, अपहरण, डकैती जैसे कई संगीन मामले दर्ज हुए. वर्ष 2004 में इटावा पुलिस ने उसे व श्याम जाटव को जेल भेजा था

औरैया में फिरौती के लिए अपहरण के मामले में वर्ष 2005 में कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और उस समय उसे इटावा जेल में भेजा गया था. 18 साल बाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर शुक्रवार को उसकी रिहाई हो गई लेकिन उसका पति श्याम जाटव अभी जेल में ही है. आरैया जनपद के अजीतमल के नियामतपुर गांव में उसके परिवार से कोई भी सदस्य नहीं रहता है. बुआ और पिता के कत्ल के बाद एक भाई गांव में रह रहा था. सरला के जेल से बाहर आने की जानकारी के बाद गांव में शनिवार को सन्नाटा रहा. गांव में जर्जर हो चुकी झोपड़ी नुमा घर खाली था और पास में कुएं पर बैठे ग्रामीणों में चर्चा थी कि सुबह ही सरला का भाई विजय गांव से कहीं चला गया है.

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ